नई दिल्ली/रायपुर(StateTv24) : सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT), नई दिल्ली में 4 से 25 अगस्त 2026 तक आयोजित 21 दिवसीय ‘518वें अनुशयन पाठ्यक्रम’ (Orientation Course) में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और कला का शानदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण में देश के 16 राज्यों से 115 शिक्षकों ने हिस्सा लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व 10 शिक्षकों की टीम ने किया।प्रशिक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ की टीम पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में सुसज्जित होकर मंच पर पहुंची और अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ के राज्यगीत से हुई। इसके बाद शिक्षकों ने प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, कृषि, वन उपज, उद्योग और रीति-रिवाजों की जानकारी साझा की। 
लोक संस्कृति से कराया छत्तीसगढ़ का परिचय :-
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान और विरासत को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया गया। राजकीय प्रतीक व धरोहर के रूप में ‘पहाड़ी मैना’ और ‘वन भैंसा’ के बारे में जानकारी दी गई। वहीं चित्रकोट जलप्रपात, गंगरेल बांध और भिलाई स्टील प्लांट सहित प्रदेश की प्रमुख पर्यटन एवं औद्योगिक पहचान से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खान-पान अंगाकर रोटी, चीला, चौसेला, फरा, ठेठरी और खुरमी ने भी राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की अलग पहचान बनाई। लोककला एवं नृत्य की प्रस्तुति में कर्मा, सुआ, राउत नाचा और शैला नृत्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। अंत में ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के उद्घोष से पूरा सभागार गूंज उठा।
दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों का भी कराया भ्रमण :-
CCRT के उपनिदेशक डॉ. संदीप शर्मा और क्षेत्र अधिकारी श्री चंद्रमौली त्रिपाठी सहित सहयोगी सदस्यों के मार्गदर्शन में शिक्षकों को दिल्ली की राष्ट्रीय विरासत से परिचित कराने के लिए विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कराया गया। इनमें राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय, राष्ट्रीय शिल्प कला संग्रहालय, डॉ. भीमराव अंबेडकर संग्रहालय, भारत मंडपम, कुतुब मीनार परिसर और हुमायूं का मकबरा शामिल रहे। इसके अलावा NCERT और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में कला, संगीत और संस्कृति के महत्व पर व्याख्यान दिए। शिक्षकों को बच्चों को मास्क बनाना, क्राफ्ट वर्क, नृत्य और संगीत जैसी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया।
समग्र शिक्षा अधिकारियों का रहा मार्गदर्शन :-
इस उपलब्धि के पीछे राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के अधिकारियों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, उप संचालक श्री दिनेश कौशिक, सहायक संचालक श्रीमती मंजुलता साहू एवं सहायक कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती राखी सिन्हा के प्रोत्साहन और निर्देशन में शिक्षकों को राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
इन शिक्षकों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान :-
राष्ट्रीय प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले शिक्षकों में कवर्धा से कृष्ण कुमार धुर्वे, बस्तर से अर्चना ध्रुव, बालोद से रेखराज साहू, सारंगढ़-बिलाईगढ़ से पुष्पलता चौधरी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से मोहन लाल पटेल, बिलासपुर से रंजय कुमार कुर्रे, कांकेर से योगिता ओट्टी एवं शबा अंजुम शेख, बलरामपुर से विजेंद्र सिंह तथा सरगुजा से नेहा यादव शामिल रहे। इन शिक्षकों ने अपनी एकजुटता, सांस्कृतिक ज्ञान और शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और परंपराएं न केवल प्रदेश की पहचान हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। उनकी इस उपलब्धि से शिक्षा जगत और प्रदेशवासियों में हर्ष का माहौल है।















