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गौरेला पेंड्रा मरवाही :- नियम विरुद्ध आदेश के सवाल पर मरवाही CEO की कथित बदसलूकी! पत्रकार से कहा—“तेरे को जो छापना है छाप, नौटंकी मत कर”

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आदिवासी पत्रकार मिथलेश आयम से जनपद पंचायत CEO विनय कुमार सागर के कथित दुर्व्यवहार पर उठे सवाल, रोजगार सहायकों के नवीन प्रभार आदेश की वैधानिकता भी सवालों के घेरे में

गौरेला पेंड्रा मरवाही(STATETV24) : जनपद पंचायत मरवाही में ग्राम रोजगार सहायकों के नवीन प्रभार से संबंधित आदेश अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। एक ओर आदेश की नियमसम्मतता और CEO के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी मामले में सवाल पूछने वाले आदिवासी पत्रकार मिथलेश आयम से कथित बदसलूकी का आरोप जनपद पंचायत CEO विनय कुमार सागर पर लगा है। पत्रकार मिथलेश आयम का आरोप है कि जब उन्होंने नवीन प्रभार आदेश को लेकर उसके नियम, अधिकार और प्रक्रिया के संबंध में सवाल किया, तो CEO विनय कुमार सागर ने कथित तौर पर कहा—: “तेरे को जो छापना है छाप, नौटंकी मत कर।”

नियम विरुद्ध आदेश पर सवाल, फिर पत्रकार से कथित बदसलूकी :-

मामला 19 अगस्त 2026 को जनपद पंचायत मरवाही से जारी ग्राम रोजगार सहायकों के नवीन प्रभार संबंधी आदेश से जुड़ा है। आदेश के तहत पांच ग्राम रोजगार सहायकों के वर्तमान प्रभार/पदस्थापना में बदलाव किया गया है। आदेश में प्रशासनिक दृष्टिकोण और बीवी-जीरामजी योजना के कार्यों के सुचारु संचालन का उल्लेख किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह प्रभार बदलने का अधिकार जनपद पंचायत CEO को प्राप्त है? यदि अधिकार है तो उसका स्पष्ट नियम या शासनादेश क्या है? क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई?

इन्हीं सवालों को लेकर पत्रकार द्वारा जानकारी मांगे जाने पर कथित तौर पर CEO का रवैया विवाद का कारण बना।

“तेरे को जो छापना है छाप…”—कथित टिप्पणी ने बढ़ाया विवाद

पत्रकार का दावा है कि प्रशासनिक आदेश की वैधानिकता और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्हें जवाब देने के बजाय CEO ने कथित तौर पर कहा—: “तेरे को जो छापना है छाप, नौटंकी मत कर।” यदि पत्रकार द्वारा लगाया गया यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह मामला केवल एक आदेश की वैधानिकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा पत्रकार से कथित बदसलूकी और मीडिया के साथ व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

आदिवासी पत्रकार से कथित बदसलूकी, प्रशासन की भूमिका पर सवाल :-

मरवाही आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और पत्रकार मिथलेश आयम स्वयं आदिवासी समुदाय से होने की बात सामने आई है। ऐसे क्षेत्र में एक पत्रकार द्वारा प्रशासनिक आदेश पर सवाल उठाने के बाद उसके साथ कथित तौर पर इस तरह का व्यवहार किए जाने का आरोप सामने आना प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सवाल यह है कि यदि आदेश पूरी तरह नियमसम्मत था, तो पत्रकार के सवालों का जवाब संबंधित नियम, शासनादेश और दस्तावेजों के आधार पर क्यों नहीं दिया गया?

CEO के अधिकार क्षेत्र पर भी उठे सवाल :- 

पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नवीन प्रभार आदेश है। पांच ग्राम रोजगार सहायकों के प्रभार में बदलाव किस अधिकार के तहत किया गया, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है। क्या CEO को यह अधिकार शासन के किसी नियम अथवा आदेश से मिला है? क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई? क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ? आदेश का आधार सार्वजनिक होगा तो कई सवाल अपने आप स्पष्ट हो सकते हैं।

अब जिला प्रशासन से दोहरे जवाब की मांग :-

मामले में जिला प्रशासन के सामने दो प्रमुख मुद्दे हैं पहला, ग्राम रोजगार सहायकों के नवीन प्रभार से संबंधित आदेश की वैधानिकता और अधिकार क्षेत्र स्पष्ट करना; दूसरा, पत्रकार मिथलेश आयम द्वारा लगाए गए कथित बदसलूकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना। क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि आदेश किसने जारी किया। सवाल यह भी है कि नियम पूछने वाले पत्रकार को कथित तौर पर “नौटंकी मत कर” कहने की जरूरत क्यों पड़ी? अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में आदेश का नियम सामने रखता है या फिर पत्रकार से कथित बदसलूकी के आरोपों की जांच कराता है।

satyandaj@yahoo.com Avatar

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