गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही वन मंडल के गौरेला वन परिक्षेत्र में शासकीय प्लांटेशन से बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। हर्राटोला गांव की डोंगरी स्थित शासकीय प्लांटेशन से करीब 25 सागौन के पेड़ काटे जाने की खबर फैलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने काटी गई सागौन की लकड़ियां और बल्लियां जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
मुखबिर की सूचना पर दबिश
जानकारी के अनुसार, वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गिरवर निवासी मुकेश उर्फ मुक्कू द्वारा हर्राटोला डोंगरी स्थित शासकीय प्लांटेशन से सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। पेड़ों को काटने के बाद उनकी लकड़ियों को बल्ली बनाकर देवी चौरा के पास लाकर रखा गया था। विभागीय कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपियों ने काटी गई लकड़ियों को आसपास की झाड़ियों और घास में छिपाने का प्रयास भी किया।
RFO के नेतृत्व में कार्रवाई
सूचना के आधार पर गौरेला वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) ज्योत्सना पांडेय के नेतृत्व में वन अमले ने मौके पर दबिश दी। टीम ने घटनास्थल का बारीक निरीक्षण किया और वहां से भारी मात्रा में सागौन की लकड़ियां जब्त कीं। वन विभाग अब यह सटीक आकलन कर रहा है कि प्लांटेशन से कुल कितने पेड़ काटे गए हैं और इस अवैध गतिविधि में कौन-कौन शामिल हैं।
बीट गार्ड की निगरानी पर सवाल
शासकीय प्लांटेशन की नियमित सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी वन विभाग के मैदानी अमले की होती है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने और लकड़ियों को करीब दो किलोमीटर दूर देवी चौरा तक पहुंचा दिए जाने के बावजूद भनक न लगना, संबंधित बीट गार्ड की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कटाई किस समय की गई और परिवहन के लिए किन साधनों का उपयोग हुआ।
दोषियों और लापरवाह कर्मियों पर होगी सख्त कार्रवाई
वन परिक्षेत्र अधिकारी ज्योत्सना पांडेय ने बताया कि सागौन राष्ट्रीयकृत वन उपज की श्रेणी में आता है और इसकी अवैध कटाई गंभीर दंडनीय अपराध है। मामले में वन अधिनियम के तहत अपराध पंजीकृत कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी विभागीय कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।














