कटघोरा/कोरबा(StateTv24) : कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत आने वाले चैतमा वन परिक्षेत्र के ग्राम तेलसरा सर्किल (बरस घट्टी जंगल) में सैकड़ों पौधों और पेड़ों की बेतहाशा कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही थी, तब वन विभाग के आला अधिकारी और गश्त करने वाले मैदानी कर्मचारी आखिर कहां थे?
वन सुरक्षा में भारी चूक या मिलीभगत?
बताया जा रहा है कि बरस घट्टी जंगल में बड़ी संख्या में पौधे काट दिए गए, लेकिन लंबे समय तक विभाग के जिम्मेदार अमले को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। वन क्षेत्र में हरियाली की सुरक्षा के लिए बकायदा वनरक्षकों और अन्य मैदानी अमले की ड्यूटी तय होती है, जिन्हें नियमित गश्त करनी होती है। ऐसे में तेलसरा सर्किल में सैकड़ों पौधों का कट जाना और विभाग को भनक तक न लगना, सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की भारी विफलता की ओर इशारा करता है।
वन विभाग से उठते सीधे और चुभते सवाल :-
क्या इस क्षेत्र में वन अमले द्वारा नियमित गश्त नहीं की जाती?
क्या मैदानी कर्मचारियों द्वारा कभी मौके का निरीक्षण किया गया?
क्या इन पौधों की कटाई की जानकारी किसी विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है?
यदि यह कटाई पूरी तरह से अवैध है, तो अब तक लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश :-
जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और ग्रामीणों के जीवन का मुख्य आधार है। इस तरह की अंधाधुंध कटाई भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट को न्योता दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में क्षेत्र की हरियाली पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
उच्चस्तरीय जांच की मांग और विभाग की निष्क्रियता :-
तेलसरा सर्किल की यह घटना वन विभाग की घोर निष्क्रियता का जीता-जागता उदाहरण है। अब देखना यह है कि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करता है, या फिर यह शिकायत भी लालफीताशाही और कागजों में सिमटकर रह जाएगी।
StateTv24 की मांग है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी तत्काल एक टीम भेजकर स्थल का निरीक्षण कराएं, कटे हुए पौधों की वास्तविक संख्या का सत्यापन करें और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।















