कोरबा पसान : आज के दौर में जहां स्वार्थ सिर चढ़कर बोलता है, वहीं कुछ लोग खामोशी से समाज की तस्वीर बदलने में जुटे हैं। इन्हीं निस्वार्थ कर्मवीरों और अपनी मेधा का लोहा मनवाने वाले होनहारों के सम्मान में पसान एक भव्य आयोजन का गवाह बना। शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के मोर्चे पर डटे रहने वाले शूरवीरों को जब मंच से प्रशंसा पत्र सौंपा गया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
सेवा करने वालों का सम्मान समाज के लिए एक कड़ा संदेश :-
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हुंकार भरते हुए कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने दो-टूक शब्दों में कहा कि बिना किसी लालच के समाज के लिए खुद को खपाने वालों का सम्मान कोई महज रस्म नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश और प्रेरणा है, जो अब तक सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते आए हैं। मेधावी छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिभाओं का सम्मान उनके सपनों को एक नई और ऊंची उड़ान देता है।
मंच पर दिखा दिग्गजों का भारी जमावड़ा :-
इस भव्य आयोजन में राजनीतिक और सामाजिक दिग्गजों की मजबूत मौजूदगी ने कार्यक्रम की अहमियत को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से इनकी उपस्थिति रही डॉ. पवन सिंह कोरबा जिला पंचायत अध्यक्ष, मोहित राम केरकेट्टा पूर्व विधायक, पाली-तानाखार, प्रकाशचंद जाखड़ जनपद उपाध्यक्ष, पोड़ी-उपरोड़ा, जनपद सदस्य संतोष मरावी, सरपंच संघ अध्यक्ष प्रताप मरावी, ग्राम पसान सरपंच सुरेंद्र तिग्गा, उपसरपंच प्रतिभा वर्मा, आनंद मित्तल एवं बचनसाय कोराम सहित क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित हुए।
आयोजन की रीढ़ जुनैद संदीप की जोड़ी और चाक-चौबंद प्रबंधन :-
किसी भी सफल आयोजन के पीछे मजबूत सिपाहसालारों की मेहनत होती है। इस पूरे कार्यक्रम को जमीन पर उतारने और उसे धारदार बनाने का प्रमुख श्रेय जुनैद खान और संदीप जाखड़ की को जाता है, जिन्होंने अपनी कुशल रणनीति से इसे ऐतिहासिक बना दिया।
व्यवस्थापको का रहा कार्यक्रम में बेहतरीन योगदान कार्यक्रम मे कोई चूक न हो, इसके लिए एक मजबूत टीम लगातार मोर्चे पर डटी रही। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे मनीष जालान, सोमवार सिंह तिग्गा, सुरेश साहू, उदय सिंह वाकरे जगतपाल सिंह आयाम, दिलीप कोराम, जफर खान, इब्राहिम खान। कमलेश्वर करीयाम, इसराइल खान, उदय यादव, ओमप्रकाश यादव हेमचंद, गौतम और अजय इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वालों को अब गुमनामी के अंधेरे में नहीं रहने दिया जाएगा, बल्कि उन्हें वह मंच मिलेगा जिसके वे असल हकदार हैं।















