गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM): जिले में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे सिस्टम की छाती पर पैर रखकर खनिज संपदा की खुलेआम लूट मचा रहे हैं। एक तरफ मौहरीटोला रेत भंडार से रात के अंधेरे में दर्जनों हाईवा गाड़ियां धड़ल्ले से अवैध रेत लेकर फर्राटे भर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले के माइनिंग अधिकारी आदित्य मानकर कार्रवाई के नाम पर शायद किसी ‘शुभ मुहूर्त’ के निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
अंधेरे का साया और माफियाओं का राज
जैसे ही सूरज ढलता है, मौहरीटोला में माफियाओं का असली खेल शुरू हो जाता है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, बेखौफ रेत माफिया रातों-रात हाईवा के जरिए अवैध रेत की तस्करी कर रहे हैं। इलाके की सड़कों पर गरजते इन भारी वाहनों की आवाज हर किसी को सुनाई देती है, सिवाय उस माइनिंग विभाग के, जिसे इस लूट को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुंभकर्णी नींद में माइनिंग अधिकारी
अवैध रेत भंडारण और परिवहन के इस खुले खेल के बीच माइनिंग अधिकारी आदित्य मानकर की यह सुस्ती कई गंभीर सवाल खड़े करती है। कार्रवाई के नाम पर विभाग के हाथ-पैर जैसे लकवाग्रस्त हो गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अवैध रेत माफियाओं पर नकेल कसने के लिए पंचांग देखकर मुहूर्त निकाला जाएगा? जब माफिया बेखौफ होकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं, तब एक जिम्मेदार अधिकारी का इस कदर मौन रहना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि किसी गहरी ‘सेटिंग’ और ‘सिस्टम की मिलीभगत’ की ओर सीधा इशारा करता है।
क्या अब टूटेगी नींद?
जनता अब यह पूछने को मजबूर है कि आखिर मौहरीटोला में रातों-रात गरजने वाले इन हाईवा ट्रकों की धूल माइनिंग अधिकारी की आंखों तक क्यों नहीं पहुंच रही? यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकारी खजाने की इस खुली लूट पर आदित्य मानकर कब अपनी सुस्ती त्यागते हैं और उनके पंचांग में इन रेत माफियाओं पर कार्रवाई करने का ‘शुभ मुहूर्त’ आखिर कब आता है। या फिर सब कुछ यूं ही अंधेरे के साये में लुटता रहेगा।















