कोरबा/पसान(STATETV24) : विकास की अंधी दौड़ में जब सिस्टम आम जनता की रोजी-रोटी को कुचलने लगे, तो बगावत तय है। कोरबा जिले के ग्राम पंचायत बैरा (पसान) के ग्रामीणों और स्थानीय सरपंचो का गुस्सा अब फूट पड़ा है। पेंड्रारोड से गेवरा दीपका को मिलाने वाले रेल कॉरिडोर के निर्माण (जो विगत 5 वर्षों से चल रहा है) के नाम पर रेलवे ने दशकों पुराने सार्वजनिक रास्ते को बंद कर दिया है। यह कोई आम रास्ता नहीं, बल्कि आसपास के 70 किलोमीटर के दायरे में इकलौते और बेहद खूबसूरत ‘उदरदा पर्यटन स्थल’ की लाइफलाइन है।
पर्यटन चौपट, रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार
रेलवे की इस मनमानी से विशाल जलराशि और जंगलों से घिरे उदरदा पर्यटन स्थल का भविष्य भारी खतरे में पड़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों और सरपंचो के द्वारा 7 सितम्बर 2026 को जिला कलेक्टर को सौपेंगे ज्ञापन उसमे साफ कहा है कि रास्ता बंद होने से पर्यटकों का आना पूरी तरह रुक गया है, जिससे स्थानीय व्यवसाय ठप हो गया है। सिस्टम की लापरवाही का आलम यह है कि ग्रामीणों और दुकानदारों के आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक और सुगम मार्ग तक नहीं छोड़ा गया है। परिणामस्वरुप, पर्यटन पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के सामने अब रोटी-रोजी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञापन में प्रशासन की कुंभकर्णी नींद तोड़ने के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम
सरपंचो और ग्रामवासियों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन को ज्ञापन में 10 दिन का अल्टीमेटम देंगे। ग्रामीणों की मांग बिल्कुल स्पष्ट और जायज है जनहित को ध्यान में रखते हुए इस रास्ते पर रेलवे अंडरपास (RUB), ओवरब्रिज (ROB) या कोई अन्य सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तुरंत मुहैया कराया जाए। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 10 दिवस के भीतर स्थल का निरीक्षण कर इस समस्या का संतोषजनक निराकरण नहीं किया गया, तो समस्त क्षेत्रवासी अपनी आजीविका और पर्यटन स्थल को बचाने के लिए सड़क पर उतरकर उग्र चक्काजाम करने को बाध्य होंगे।















