माइनिंग डायरेक्टर आदित्य मानकर बोले—“अभी खनिज निरीक्षक मौजूद नहीं”, 4-5 दिन बाद लौटेंगे तब होगी कार्रवाई; सवाल-तब तक कौन रोकेगा रेत का खेल?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(STATETV24) । मरवाही तहसील क्षेत्र के मौहरीटोला में कथित बड़े पैमाने पर अवैध रेत भंडारण के मामले में अब जिला खनिज विभाग के जवाब ने ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा क्षेत्र से कथित अवैध रेत उत्खनन के बाद मौहरीटोला में सैकड़ों ट्रैक्टर रेत डंप किए जाने की सूचना के बीच जब मामले में कार्रवाई को लेकर जिला खनिज विभाग के माइनिंग डायरेक्टर आदित्य मानकर से जानकारी ली गई, तो उनका कहना है कि फिलहाल खनिज निरीक्षक मौजूद नहीं हैं, इसलिए कार्रवाई नहीं हो सकती।
निरीक्षक नहीं हैं तो क्या कार्रवाई रुक जाएगी?
माइनिंग डायरेक्टर के अनुसार खनिज निरीक्षक के चार से पांच दिन बाद आने पर उक्त कथित अवैध रेत भंडारण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग के इस जवाब के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि यदि मौके पर अवैध भंडारण की सूचना मिल चुकी है, तो कार्रवाई के लिए चार-पांच दिन इंतजार क्यों?
चार-पांच दिन में रेत गायब हुई तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मौहरीटोला में वास्तव में सैकड़ों ट्रैक्टर रेत भंडारित है, तो निरीक्षक के आने तक इसकी निगरानी कौन करेगा? क्या इस दौरान रेत को हटाया या दूसरे स्थान पर परिवहन किए जाने से रोकने के लिए कोई व्यवस्था की गई है? यदि कार्रवाई से पहले ही भंडारित रेत गायब हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
रूमगा से मौहरीटोला तक कथित रेत नेटवर्क की जांच जरूरी :-
रूमगा की रेत खदान, सिलपहरी और कोलबीरा क्षेत्र से कथित अवैध उत्खनन की शिकायतों के बीच मौहरीटोला में बड़े पैमाने पर कथित भंडारण की जानकारी सामने आना पूरे मामले की कड़ी जांच की मांग करता है। केवल डंपिंग स्थल पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी; रेत के स्रोत, परिवहन, भंडारण और आगे बिक्री की भी जांच किए जाने की जरूरत है।
एनजीटी की रोक के बीच विभागीय कार्रवाई का इंतजार :-
एनजीटी के निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर पहले से सवालों के बीच अब विभाग द्वारा कार्रवाई को चार-पांच दिन आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षक के लौटने के बाद विभाग मौके पर पहुंचता है या नहीं और कथित भंडारित रेत की वास्तविक मात्रा तथा उसके स्रोत का सत्यापन करता है।फिलहाल माइनिंग डायरेक्टर के बयान ने कार्रवाई से ज्यादा एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब कथित अवैध रेत भंडारण की सूचना विभाग तक पहुंच चुकी है, तो कार्रवाई के लिए चार-पांच दिन का इंतजार क्यों? और तब तक इस कथित रेत के डंपिंग की निगरानी कौन करेगा?















