लोकेशन: पोड़ी उपरोड़ा

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। कोरबा जिले के दीपका, रंजना, बांका, डोड़की, हरदी बाजार से लेकर पोड़ी उपरोड़ा के विभिन्न वनांचल और ग्रामीण मार्गों पर पशुओं के परिवहन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन के साथ रात के समय भी अलग-अलग रास्तों से गाय, भैंस, बकरी सहित अन्य पशुओं को वाहनों में ले जाने की गतिविधियां देखी जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि कटघोरा–पोड़ी उपरोड़ा–चोटिया–कोरबी–मोरगा, कटघोरा–तुमान–जटगा–पसान–कोटमी और चैतमा–घुईचुवा–पहाड़गांव–तेलसरा–कोड़गार–बसंत–कोटमी जैसे ग्रामीण एवं वनांचल मार्गों का इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन मार्गों से होने वाले कथित परिवहन की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
केवल एक ही पिकअप को लेकर नहीं ,बल्कि कईं एम.पी.नंबर वाहनो गतिविधियों पर उठे सवाल

इसी बीच आज दिनांक 6/10/26 मगंलवार को सुबह 8 बजे पिकअप क्रमांक MP 65 GA 2608 से भैंस-भैंसी परिवहन का मामला भी चर्चा में है। करीब 15 दिन पहले इसी वाहन से संबंधित खबर सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वाहन से जुड़े व्यक्ति की पहचान गांधी जायसवाल, रेउसा, थाना कोतमा, जिला अनूपपुर (मध्यप्रदेश) निवासी के रूप में बताई गई थी।
बताया गया है कि पशुओं की खरीदी की रसीद रंजना क्षेत्र से संबंधित है। हालांकि, पशुओं के परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति,नहीं है दस्तावेज और वाहन से संबंधित कागजात वैध हैं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में खरीदी रसीद, परिवहन दस्तावेज और संबंधित अनुमति की जांच आवश्यक हो जाती है।
थाना-चौकी और नाकों से गुजरने के बाद भी निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में बिना आवश्यक दस्तावेज या अनुमति के पशुओं का परिवहन हो रहा है, तो थाना, पुलिस चौकी और विभिन्न नाकों से गुजरने वाले वाहनों की जांच किस स्तर पर हो रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि वनांचल के कई रास्तों पर इस तरह की गतिविधियों की चर्चा लंबे समय से है, लेकिन अब तक प्रभावी जांच या बड़ी कार्रवाई की स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जांच में सामने आ सकता है पूरा सच
मामले में यह जांच जरूरी है कि पशुओं की खरीदी कहां से हुई, खरीदी रसीद किसके नाम पर है, पशुओं को कहां ले जाया जा रहा है तथा अंतरराज्यीय परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से संयुक्त जांच की मांग की है। उनका कहना है कि वनांचल के प्रमुख मार्गों के साथ वैकल्पिक ग्रामीण रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाकर संदिग्ध वाहनों की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।
फिलहाल MP 65 GA 2608 सहित अन्य वाहनों से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए पशु परिवहन को अवैध या तस्करी का मामला मानने से पहले संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।













