गौरेला पेंड्रा मरवाही(STATETV24) : नव-निर्मित शासकीय स्कूल मकान में भ्रष्टाचार का खेल किस कदर फल-फूल रहा है, इसकी बानगी मरवाही के पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय स्कूल में साफ देखी जा सकती है। महज दो साल पहले बनी स्कूल की नई मकान पहली ही कुछ बारिशों में हांफने लगी है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को ‘अंतिम तक न्यूज़’ द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद आखिरकार प्रशासनिक अमले मामले को संज्ञान में लें ली है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जिंदगी से खिलवाड़: दरकती दीवारें और ‘करंट’ का खौफ :-
महज दो वर्ष पूर्व तैयार हुई इस मकान की दीवारों में आई दरारें और छत से टपकता पानी निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदार की नीयत पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। बारिश के दिनों में छत से पानी रिसता है और ठीक उसी के पास खुले व असुरक्षित बिजली के बोर्ड लटक रहे हैं। यानी पढ़ने आने वाले मासूम बच्चों के सिर पर हर वक्त मौत मंडरा रही है। पानी और बिजली के इस जानलेवा संगम से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक अनजान बने बैठे थे।
पत्रकार की पहल, प्रशासन में हड़कंप :-
पत्रकार मिथलेश आयम ने इस पूरे मामले की शिकायत साक्ष्यों के साथ और प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था जिसके बाद शिकायत को संज्ञान में जिला शिक्षा अधिकारी और जिला प्रशासन ने ली। शिकायत में स्कूल भवन की तकनीकी जांच, बदहाल हिस्सों की तत्काल मरम्मत और विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग उठाई गयी थी। खबर प्रकाशित होने और जन दबाव बनने के बाद DEO ने बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर और संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग (बिलासपुर) को भी भेजी गई है।
अधिकारी बचेंगे या तय होगी जिम्मेदारी?
जांच के आदेश से उम्मीद तो जगी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या फिर घटिया निर्माण कराने वाले ठेकेदारों और इसे हरी झंडी देने वाले अफसरों पर गाज गिरेगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर क्या सख्त कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।















